Page 28 - rural development intro
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भाित में ककए जाने वाले महत्त्वपूणण ग्रामीण अध्ययन पहली



               बाि 1955 में भाितीय ग्रामों पि पुस्तक ें  एवं शोध पत्रों को



                                                                                                       े
               प्रकामशत  ककया  गया  जजनमें  प्रमुख  थे-  एम.  सी.  दुब  की


                                     े
               'इडडयन ववलज', डी.एन. मजूमदाि की 'रूिल प्रोफाइल',' ,
                   ं

               मैजक्कम  मैरिऑट  की  'ववलज  इजडडया'  औि  एम.  एन.
                                                               े


               श्रीननवास की 'इडडयास ववलजजस'। इसी विण एक सम्मेलन
                                                             े
                                         ं

               का आयोजन ककया गया जजसकी अध्यक्ष इिावती कवे था



               एवं वविय था'ग्रामीण अध्ययन'। 'सोसायटी इन इजडडया'



               नामक पुस्तक में इस सम्मेलन का ब्यौिा हदया गया ह।
                                                                                                      ै







               1950 क े आस-पास ग्रामों पि कछ ववननबंध भी प्रकामशत
                                                                   ु


               ककए  गए  जजनमें  से  प्रमुख  हैं-  जी.  एम.  कोस्टयसण  की
                                                                                                े


                                                                                     ं
               'ट्वाइस  बानण'  (1957),  एस.सी.  दूब  की  'इडडयास  चेंजजग
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               ववलजजस'  (1958),  डी.  एन.  मजूमदाि  की  'कास्ट  एडड
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               कम्यूननकशन  इन  ऐन  इजडयन  ववलज'  (1958),  ऑस्कि
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               लुईस  की  ववलज  लाइफ  इन  नादन  इजडडया'  (1958)  एवं
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                                                                      ण
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