Page 43 - Sanidhya 2024
P. 43
ग्वााशिलायारा दोंगड
ु
ं
ि
ि
ृ
े
े
ु
भाा�तवा� प्र�कित � संौन्दया तर्था ऐकितहैाकिसं� औ� मुा�वा �ला �ा शीासं� मुा�किसंहै द्वाा�ा अप�ी प्रयासंी गजा�ी
ै
ृ
ं
भाण्डा� है। भाा�त � इकितहैासं मु ग्वााकिलया� �ा इकितहैासं गौ�वाशीाली �ा�ी मुग�या�ी � किलए कि�मुाण ��ायाा र्था।
े
े
ि
ि
े
ै
ू
ं
औ� ऐकितहैाकिसं� रूप सं अत्यंत मुहैत्वपण �हैा है। ग्वााकिलया� मु.प्र. मु ं
े
ं
ै
ॅ
खिस्थात किजाला जां कि� �ाज्य �ी �ाजाधैा�ी भांपाल सं उत्त� कि�शीा मु 430 (3) �न गोफाा सोमह- 12 फी� उची जा�
ु
ू
ै
ू
ै
े
ि
े
ु
ु
े
ं
कि�मुी. �ी ��ी प� खिस्थात है। सं� संम्राा� ता�सं� �ी �ग�ी मु सं�ंं � तीर्थ�� �मुी�ार्थ �ी खुड़ीगासं� प्रकितमुा 10
ु
ि
ु
ै
े
े
े
ि
संार्थ हैी मु�ं�मु दृश्य �खु� �ं किमुलत है। �छु मुा�वा कि�किमुत तं उधैली गफाऐं जा� तीर्थ�� �ी प�मुासं� एवा ं
ै
ृ
ु
ु
�छु प्रा�कित�, ग्वााकिलया� अप�ी संमुद्वा संास्ककित� किवा�ासंत � किलए खुड़ीगासं� मुद्रा मु प्रकितमुाए पहैाड़ीी चट्टा�ंं श्रीीमतीी सोनीतीा सिंनगोम,
ं
ं
े
ं
ृ
ृ
ु
ु
ु
ि
ं
ै
ं
ै
जाा�ा जााता है। हैमु मुंहै�ा संल्ताा�गढ़ा एवा पहैाडगढ़ा पवाायाा (पवा मु �ं �ा��� ब�ाई गयाी है। इ��ी संख्याा 100 पत्नीी �ी �ाजा �मुा� कि�गमु, DIG
ं
ू
ं
संमुहै �द्र ग्वााकिलया�
ं
ू
े
े
ै
ं
े
ै
ं
े
पद्माावाती) ) � शीलकिच�ंं सं ज्ञाात हैंती है भाा�त � आकि� ग्रर्थ सं भाी अकिधै� है।
ु
े
मुहैाभाा�त मु इसं क्ष� �ं �न्तुलप� पद्माावाती, च�ी ��वा� �ग�ंं �ा
ु
ं
े
ै
े
े
े
उल्लीखु प्राप्त हैंता है। ग्वााकिलया� इकितहैासं � ए� बहुत बड �ाल
ु
ं
े
ै
े
ु
खुण्ड सं गजा�ा है, इसं�ा भाा�त � लगभाग संभाी प्रमुखु �ाजावाशीं सं े
या� �� संबधै �हैा है। शी�ीवाशी � शीासं��ाल मु तं इसं भाा�त �ी
े
ं
ं
े
ू
ं
ै
े
ं
े
े
�ाजाधैा�ी �है� �ा गौ�वा प्राप्त हुआ र्था।
े
े
े
ग्वााकिलया� हैमुशीा सं हैी अप� गौ�वाशीाली
े
इकितहैासं �ं �हैता हुआ अप� शीा��ा� कि�लंं औ� जाकि�ल मुहैलंं
ि
�ं �शीाता हुआ पया��ंं �ं अप�ी ओं� आ�कि�त ��ता �हैा है।
ि
ै
ि
श
दशानीया स्थल ः
(1) ग्वाासिंलया� काा सिंकाला- किवाशीाल चट्टा� प� खिस्थात बलआ पत्था� सं े
ु
ॅ
ु
ु
ि
ि
ै
कि�किमुत है। याहै �ग लगभाग 100 मुी�� �ी उचाई प� खिस्थात है। �ग ि
ै
े
े
ं
ि
ै
पहुच� � ती� मुाग है।
प्रथम द्वाा� – बा�लगढ़ा द्वाा� (4) चतीभा� मसिंद� - शीन्य �
ू
े
ु
ु
ं
श
ं
ं
े
किद्वातीया द्वाा� - हैकिर्थयाा पौ� द्वाा� प्रयांग � बा� मु पहैली पख्ताा जाा��ा�ी चतभाजा मु लग ए�
ु
ु
ि
ु
े
े
ि
ू
ु
े
े
ं
तीतीीया द्वाा�- ढोंडापौ� द्वाा� (प्रवाशी वाकिजात) किशीलालखु 900AD पवा �ा है, जां कि� शीन्य सं संबकिधैत संबसं प�ा�ा
ू
ं
ै
ि
े
े
ृ
अन्य द्वाा� – लहैंड़ीी द्वाा� (पहुच मुाग अत्यंत �किठ� तग गकिलयांं � किशीलालखु है । �शी-किवा�शी � �ई शींधैार्थी औ� किवाशी�ज्ञा याहैा शींधै
े
े
ै
ं
ँ
े
ं
े
े
ि
े
ं
े
ं
े
�ा�ण) � किलए आत है ।
ु
(2) गो��ी महल-
े
े
ू
ि
े
े
े
बा�लगढ़ा द्वाा� सं प्रवाशी ��� � बा� �ायाी ओं� ए� किवाशीालद्वाा� सं (5) मानमसिंद�- संीधैी पहैाडी प� ग्वााकिलया� �ग � पवाोत्त� भााग
े
ु
ं
े
ं
प्रवाशी ��� � प�ात ती� मुकिजाला मुहैल सं� 1512 मु तंमु� मु खिस्थात चा� मुकिजाला भावा� किजासं�ी �ं मुकिजाल भाकिमुगत है। मुा�मुकि��
ं
े
ू
ं
ं
ं
े
ं
ै
ं
43