Page 44 - Sanidhya 2024
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�ी �ीवाा�ं प� �क्कााशीी ,पष्पाा�कित किजा�मु �ग किब�गा मुी�ा भा�ा गयाा (11) गोुरू दातीा बान्दाी छोोड़ गोुरूद्वाा�ा- ग्वााकिलया� �ुगि प� खिस्थात
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र्था। �ीवाा�ंं प� तं�ण, स्तुमु, �ल � वाक्ष, हैार्थी, किसंहै, मुया�, वाा�� किसंखुंं �े छु�वाे गुरू �ी है�गंकिवान्द किसंंहै जाी �ी स्माृकित मुं कि�किमुित हैै। ।
एवा हैसं आकि� आ�कितयांं �ं उ�� �� उ�मु लाल, है�, �ील, संफ� जा��ुकित अ�ुसंा�, ए� बा� जाब जाहैाँगी� गंभाी� रूप संे बीमुा� हुआ
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एवा �ाल मुी� � �गंं सं भा�ा मुा�ंं किवाशीाल ��वाासं प� कि�संी � त ब
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किच��ा�ी �ा उत्काष्ट् �ला प्र�शी� कि�याा हैं।
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(6) सिंवाक्रम महल (मसिंद�)- मुा�मुकि�� सं सं�ा हुआ उत्त�ी कि�शीा मु ं
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खिस्थात है। �ं मुकिजाला भावा� अन्य मुहैल ,�ण मुहैल,जाहैागी� मुहैल,
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शीहैाजाहैा मुहैल, जाौहै� ताल एवा �ाणा �ी छुत�ी अस्साी खुम्ब बावाड़ीी,
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संहैस्त्बाहु अर्थवाा संासं-बहूँ मुकि�� संमुहै वाधैमुा� मुकि�� एवा ं
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गगंलाताल तली �ा मुकि��।
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(7) काणी महल- इसं�ा कि�मुाण 15वाीं सं�ी मु कि�याा गयाा । याहै ए�
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किवाशीाल चा� मुकिजाला भावा� है किजासं�ी स्थाापत्यं शीली किवाशीद्धा भाा�तीया
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हैै ।
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(8) �हागोी� महल- ग्वााकिलया� �ग प� ब� भावा�ंं मु संबसं अकिधै� गरूजाी �ं छुंड़ी� �ी संलाहै �ी गयाी प�न्तु गरु है�गंकिवा� जाी �ी
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किवाशीाल है। याहै ए� आयाता�ा� भावा� है । इसं� मुध्य मु ए� कि�� र्थी कि� याहैाँ �ै � कि��ो� �ाजााओंं �ं भाी छुंड़ीा जाायाे । तब गुरु
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जाी �ी बात मुा�त हुए बा�शीाहै � ए� प्रस्तुावा �खुा कि� किजात� �ाजाा
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आप� �ामु� �ं प�ड़ी�� जाा सं�ग उ��ं मु� �� कि�याा जाायागा
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। तब गरूजाी � ए� ऐसंा चंगा ब�वाायाा किजासं प�ड़ी�� 100 �ाजाा
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भाी गरूजाी � संार्थ मु� हैं गया । तभाी सं इसं गरुद्वाा� �ं गरु�ाता
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ब�ी छुंड़ी गरुद्वाा�ा �हैा जाा� लगा। इसं�ा कि�मुाण गरुद्वाा�ा शीली मु ं
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संफ़े� संगमु�मु� द्वाा�ा कि�याा गयाा है।
�ई धैमुो �ं ए� संार्थ किलए याहै ग्वााकिलया� �ी
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शीा� बढ़ााता हुआ ग्वााकिलया� �ग जाहैा �भाी ता�सं� � सं� भाी गजाा
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��त र्थ। ग्वााकिलया� मु सं� संम्राा� ता�सं� � मु�ब� � संार्थ 1
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कि�मुी �ी ��ी प� ता�सं� � गरु संफी संत �ा मु�ब�ा भाी खिस्थात
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है। ए� �त �र्था�संा� �हैा जााता है ता�सं� � मु�ब� � पासं
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खिस्थात इमुली � पड़ी �ी पकित्तयाा खुा� सं गला सं�ीला हैंता है।
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किवाशीाल आहैता खिस्थात है, किजासं� मुध्य मु �ं मुकिजाला बाबड़ीी ब�ाई
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गयाी है, किजासंमु वा�ा �ा जाल भाण्डा�ण �� वा� भा� उपयांग कि�याा ग्वााकिलया� �ग मु खिस्थात संबसं प�ात� किलखिखुत
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जााता है । प्रमुाण “0” शीन्य �ा किशीलालखु जां कि� 9 वाीं शीताब्दीी मु कि�किमुत
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चतभाजा मुकि�� मु खिस्थात है। ग्वााकिलया� � कि�ल मु हैी बाब� � अप�ी
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(9) शााह�हा महल – मुग़ल बा�शीाहै शीाहैजाहैा द्वाा�ा इसं�ा कि�मुाण वासंीयात भाी किलखुी र्थी किजासंमुं उन्होंंने�े धैमुिकि��पेक्ष �है �� गाया �ी �क्षा
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1628- 1658 ई० मु ��वाायाा गयाा र्था। �किक्षण �ी याा�ा � �ौ�ा� ���े �े किलए �संीहैत-तुजाु�े -बावा�ी मुं किलखुा आजा भाी याहै वासंीयात
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आत जाात संमुया शीाहैजाहैा अप�ी बगमुंं � संार्थ याहैा रु�ा ��त र्थ। भांपाल �ी �ाजा�ीया लाइब्रेे�ी मुं संु�किक्षत �खुी हैै ।
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इसं मुहैल सं लगभाग प�ा प�ा�ा ग्वााकिलया� शीहै� �खुा जाा �ता है।
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(10) मग़ल बाादशााह �हागोी� (1605-1627 ई०) � किसंखुंं � गरु
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�ी है�गंकिवा� किसंहै जाी �ं याहैा 12 वा�ं त� ब�ी ब�ा�� �खुा गयाा
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