Page 63 - Sanidhya_2024
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हिपलाना लगा। देकााना वााला बोला बड़ा प्यूाराा औरा सदेरा पप्पीी �। क्योा एका हिवार्ष�रा फेना फेलाय बठाा था। भरावाी ना आवा देखा ना तावा। वाो उस
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नााम � इसकाा? रुद्री �प �ो गया। तभी अ�ानाका अघौराी ना का�ा परा �पटे पड़ीं। शुोरागल औरा भरावाी काी सहि�यता स हिवार्ष�रा वा�ा स े
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‘भरावाी‘। रुद्री �प�ाप खड़ा था। रुद्री “भरावाी” काो दे� पीता छूोड़कारा �ला गया। रुद्री काी जीाना ब�ी। डोरा स उसकाा �लका सख गया। सभी
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जीाना लगा। देकााना वााला बोला ‘भाईसा�ब आपकाी भरावाी‘। रुद्री ना ना “�रा-�रा शुम्भ” काा जीयघोर्ष हिकाया। भरावाी रुद्री का समीप बठा गई।
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का�ा ‘मराा काोई ना�ीं � औरा वाो वा�ा स �ला गया। अघौराी बोला ‘हिजीस रुद्री ना भरावाी काो उठााया औरा का�ा ‘भरावाी‘ आजी स तम मरा साथ �ो।
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जीीवानादेाना हिदेया �, उस ऐस �ी छूोड़कारा �ल देोग। रुद्री बोला ‘अब रुद्री का ��रा परा खशुी औरा आखों म आस थ उसना स्ना� स भरावाी काा
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हिकासी अपना काो खोना काी ताकात ना�ीं � म�म। वाो �ीरा स बोला डोरा हिसरा स�लाया। श्वााना सबस वाफेादेारा �ोत �। मादेा श्वााना भरावाी स रुद्री
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लगता �, औरा वा�ा स �ला गया। भरावाी भी उसका पीछू-पीछू आना काो लगावा �ो गया। जीब सब अपना छूटे जीाय तो पालत जीानावारा
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लगी। रुद्री ना उस मड़कारा भी ना�ीं देखा। अकालापना वा अलगावा काो देरा कारात �। हिजीनाम काोई छूल-प्रप� काी
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भावानाा ना�ींं �ोती।
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गौराीकाण्ड पहु�ना का बादे रुद्री ना उसी टेीना शुडो का नाी� अगली सब� रुद्री भरावाी काो लकारा सोनाप्रयाग आया। उसना े
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बसराा हिकाया। रााहि� काा प�रा था औरा �ाराों तराफे शुाहित थी। नाींदे म वा�ा अपनाी साईहिकाल का पीछू भरावाी का बठाना काी जीग� बनावााई।
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सासों वा काछूका खरााटेों का बी� �ल्की सी सरा-सरााना काी आवााजी आ उसम गद्दीी लगाई औरा भरावाी काो उसम हिबठाा हिदेया। तभी एका पहिलस
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रा�ी थी। सभी थका-मादे हिनाद्रीा का आगोशु म बस� सो रा� थ। भरावाी वााला आया औरा बोला ‘अरा य साईहिकाल �टेा य�ा स, जीाम लग रा�ा
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भी रुद्री का साथ काम्बल म आकारा �पका स हि�पकाी हुई थी। अ�ानाका �’। इसस प�ल काी रुद्री काछू का�ता भरावाी पहिलस वााल काी तराफे
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उसकाी इन्धिन्द्यं सहि�य हुईं। उसकाी आख खल गई। काछू �ी पल म जीोरा-जीोरा स घरााना लगी। पहिलस वााला थोड़ा पीछू �ोकारा नाराम आवााजी
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वाो अन्धिस्थारा �ो गई। इ�रा-उ�रा शुात कादेम औरा �ौकास हिनागा�ों स म बोला ‘भाई जीाम लग रा�ा �, �टेा ल प्लाीजी‘। रुद्री �ीरा स मस्कुरााया
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देखना का बादे आवााजी काराना लगी। सभी ग�राी नाींदे म लीना थ। भरावाी औरा साईहिकाल लकारा वा�ा स �ला गया। वाो भरावाी काो देख जीा रा�ा
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काी आवााजी स अघौराी काी आख खलीं। उसना भरावाी काो डोाटे कारा �प था। उसकाी आखों म आस थ। उसना भरावाी का खाना का हिलए बहुत
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कारााना काी �ष्ट्ा काी लहिकाना भरावाी जीोरा-जीोरा स आवााजी काराना लगी। काछू सामाना हिलया। अपनाी साईहिकाल उठााई औरा आग का सफेरा परा
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तभी रुद्री भी उठा गया औरा वाो भी भरावाी काो डोाटेना लगा। रुद्री ना देखा हिनाकाल गया। तबस भरावाी औरा रुद्री साथ-साथ भारात भ्रमण कारा रा� े
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भरावाी उसका पीछू देख कारा हि�ल्लीा रा�ी थी। रुद्री ना देखा उसका पीछू � ।
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