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कम और भा य क ल ला
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मन य इस धरती पर सबस शि तशाल ाणी ह। उसक पास ब तथा शि त दोन ह और इस लए वह बाक ा णय स जीतकर इस भ म पर
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अपना जय तंभ फहरा रहा ह। उसने बहत सार आ व कार कए ह िजसस उसने अपने ह जा त को और ताकतवर बनाया ह। परत इस ब
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का या फायदा जब यह मन य अपने काम को भलकर कवल अपने भा य का सहारा ल रहा ह? य द हम सफ भा य का सहारा लग और
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हमार कम नह ं कर ग तो भा य का भी कोई फायदा नह ं ह। भा य तभी काम करता ह जब हम हमार ओर स यास करत ह ।
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हम कवल हमारा कम करना ह और फर य द दभा य हो तो शायद उसका फल नह ं मल और य द सौभा य हो तो हम हमारा फल मल
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सकता ह। भगवद गीता म वयं ी क ण ने कहा ह,
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"कमणय वा धकार त मां फलष कदाचन।
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मां कमफलहतभ: मांत संङगो वकम ण”।।
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अथा त हमारा कम करने म ह अ धकार ह, उसक फल म कभी नह ं। इस लए हम फल क ि ट स कम नह ं करना चा हए और न ह ऐसा
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सोचना क फल क आशा क बना म कम य क ँ । आपने सना होगा क रो गय के इलाज के लए जब व ै य के पास
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कोई दवा नह ं रहती तो वह एक मामल व त को दवाई कहकर रोगी को द दता ह। रोगी का मन सोचता ह क वह सच म दवा ह और
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उसका रोग चला जाता ह य क उसने वसी मान सकता रखी थी। वस ह य द हम सोचत रह क भा य हमारा काम कर लगा, भा य हम
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जीता दगा और हम हमार कम कर तो अव य हमारा ल य ा त हो जाएगा। परत जस मन े पहला कहा, य द हम कम न कर और सब भा य
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पर ह छोड़ द तो हम सफल नह ं ह ग और हम भा य को दोष द ग।
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आपको अ सर सड़क पर बहत भ ुक नजर आत ह ग और शायद आपका दय उ ह दखकर
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पसीजता होगा। परत यह वह लोग ह िज ह ने अपना परा जीवन भा य क हाथ म रखा और इनक हालत अब बहत दयनीय ह। अब आप
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कह ग क य तो गर ब लोग ह, य भला या कम कर ग? इसका उ तर भी ह मर पास। कतने सार लोग गर ब ह और नर र ह फर भी वे
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अपने सपने पर कर रह ह ! या दभा य ने इन लोग को छोड़ दया ह? नह ं। इ ह ने अपना कम कया ह और उस कम का फल उ ह मल
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रहा ह। य भी तो गर ब ह, भ ुक भी गर ब ह परत इन दोन म अतर यह ह क जो गर ब पढ़ लख ह, उ ह ने अपना जीवन भा य क हाथ
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म नह ं रखा और अपने कम करत गए।
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अब म बस इतना कहना चाहता हँ क य द आपको जीवन के स चे सख को पाना है, तो आप अपना कम क िजए। भा य उन कम पर
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नाचेगा और आपको आपका फल मल जाएगा य क कम ह जीवन ह।
जग नाथक णन नायर १०
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