Page 109 - D:\Desktop\FlipBook\
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ै
           अभी समय ह      ै                                                                              पसा
                                                                                                          ै
                        ै
                                                                                                                           ु
           अभी समय ह,                                                                                    ह लोभ बढ़ गया द नया म , म    जो बात क  ँ  नादानी है
                                                                                                                                        े
                                                                                                                                                            ै
                                                                                                                       ं
                                                                                                                                      ै
                                                                                                                     े
           अभी नह  कछ भी  बगड़ा ह,     ै                                                                  पागल कर द इसान को जो, पस क  अजब कहानी ह।
                       ु
                                   े
            दखो अभी समय त हार पास खड़ा ह।
                                                ै
             े
                               ु
                                                                                                         जहाँ  तबा पहल  ान का था,   न आ म स मान का था।
                                                                                                                        े
                   ै
           करना ह जो काम, उसी म  मन लगा दो                                                               इ जत इसान क  होती थी, राज धम ईमान का था।
                                                                                                                 ं

           अपने पर  व वास,  रख, शक को भगा दो                                                             आज क  पीढ़  इन सबस, एकदम ह  अनजानी ह।
                                                                                                                                े
                                                                                                                                                        ै
                                                                                                                                                             ै
                                                                                                                                        ै
                                                                                                                     े
                                                                                                                                         े
           आएगा  या समय?                                                                                 पागल कर द इनसान को जो, पस क  अजब कहानी ह।
                                   ै
           समय तो टला जा रहा ह
                                                                                                               ै
                                                                                                                                  े
                                                                                                                              ै
                                                                                                         पसा ह तो सब कछ ह, य बात  सखाई जाती ह।
                                                                                                                                                      ै
                                                                                                          ै
                                                                                                                         ु
            े
                                                   ै
           दखो जीवन  यथ त हारा चला जा रहा ह

                              ु
                                                                                                         दर कर इनसान स जो, वह  कताब पढ़ाई जाती ह।
                                                                                                                          े
                                                                                                               े
                                                                                                                                                        ै
                                                                                                          ू
                                 े
           तो वीर  क समान खड़ हो जाओ अभी                                                                  ह  र तदार  पस क ,  यार कहां  हानी ह।
                     े
                                                                                                                                                ै
                                                                                                                े
                                                                                                          ै
                                                                                                                        े
                                                                                                                      ै
                े
                                   े
           करक कछ जग बीच बड़ हो जाओ अभी।                                                                  पागल कर द इसान को जो, पस क  अजब कहानी ह।
                                                                                                                       ं
                                                                                                                                                            ै
                                                                                                                                        े
                                                                                                                     े
                                                                                                                                      ै
                   ु
                    े
           या सकत  फर नह ं कभी तम उस खो कर
                                            े
                                      ु
                                                                                                         गर ब को  मलता  याय कहा, कानन तो अभी अधा ह।
                                                                                                                                                        ं
                                                                                                                                                            ै
                                                                                                                                          ू
           चाहो तम  य  नह ं स ाट भी हो कर।
                  ु
                                                                                                          ै
                                                                                                         पस स  मलता  याय कहा, जम बन गया धंधा ह          ै
                                                                                                               े
                                                                                                            े
                                                                                                                                         ु
                                      ै
           कर सकता कब-कौन धन ह इसक  समता
                                                                                                                  े
                                                                                                                              ै
                                                                                                         अ याय दख खामोश ह सब, खन बन गया पानी ह।
                                                                                                                                                          ै
                                                                                                                                       ू
                                      ै
            फर भी तमको नह ं जरा ह इसक  ममता ।                                                            पागल कर द इनसान को जो, पस क  अजब कहानी ह ।
                     ु
                                                                                                                                       ै
                                                                                                                                         े
                                                                                                                                                             ै
                                                                                                                     े
           समय ईश का  दया हआ अ त अनपम धन ह             ै
                                             ु
                                ु
                                                                                                               े
                                                                                                                                                              ै
                                                                                                                                     ै
                                                                                                                                   े
                                                                                                                                                           े
                                                                                                                                                      े
                                                                                                         घर बड और  दल अब छोट ह, इसान नीयत क खोट ह।
                                                                                                                                        ं
           यह  समय त हारा शभ जीवन ह।
                                           ै
                                ु
                        ु
                                                                                                                                                 े
                                                                                                                                            े
                                                                                                          ट हो रह ह अब सब, नौक रय  क कोट ह          ै
                                                                                                                      ै
                                                                                                                   े
           त छ कभी तम नह ं एक पल को भी जानो
                        ु
             ु
                                                                                                                                                         ै
                                                                                                                          े
                                                                                                             ै
                                                                                                               े
                                                                                                                                      े
                                                                                                        हो कस उ न त दश क , सबक मन म  बईमानी ह।
                     े
           पल-पल स ह  बना हआ जीवन को मानो।                                                              पागल कर द इनसान को जो, पस क  य अजब कहानी ह ।
                                ु
                                                                                                                                                                ै
                                                                                                                     े
                                                                                                                                         े
                                                                                                                                        ै
                                                                                                                                                े
                                          े
           ऐसा भला और तम कब पाओग
                            ु
           तो इसम  वह काम तम कर जाओ
                                ु
           सखी रह  संसार तथा तम सख पाओ।
             ु
                                      ु
                                  ु
                                                                      े
                                                              स म पसवानी ९                              मन वी पा टल ९
                                                                                                                                                                               107
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