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अभी समय ह ै पसा
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अभी समय ह, ह लोभ बढ़ गया द नया म , म जो बात क ँ नादानी है
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अभी नह कछ भी बगड़ा ह, ै पागल कर द इसान को जो, पस क अजब कहानी ह।
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दखो अभी समय त हार पास खड़ा ह।
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जहाँ तबा पहल ान का था, न आ म स मान का था।
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करना ह जो काम, उसी म मन लगा दो इ जत इसान क होती थी, राज धम ईमान का था।
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अपने पर व वास, रख, शक को भगा दो आज क पीढ़ इन सबस, एकदम ह अनजानी ह।
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आएगा या समय? पागल कर द इनसान को जो, पस क अजब कहानी ह।
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समय तो टला जा रहा ह
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पसा ह तो सब कछ ह, य बात सखाई जाती ह।
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दखो जीवन यथ त हारा चला जा रहा ह
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दर कर इनसान स जो, वह कताब पढ़ाई जाती ह।
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तो वीर क समान खड़ हो जाओ अभी ह र तदार पस क , यार कहां हानी ह।
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करक कछ जग बीच बड़ हो जाओ अभी। पागल कर द इसान को जो, पस क अजब कहानी ह।
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या सकत फर नह ं कभी तम उस खो कर
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गर ब को मलता याय कहा, कानन तो अभी अधा ह।
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चाहो तम य नह ं स ाट भी हो कर।
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पस स मलता याय कहा, जम बन गया धंधा ह ै
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कर सकता कब-कौन धन ह इसक समता
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अ याय दख खामोश ह सब, खन बन गया पानी ह।
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फर भी तमको नह ं जरा ह इसक ममता । पागल कर द इनसान को जो, पस क अजब कहानी ह ।
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समय ईश का दया हआ अ त अनपम धन ह ै
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घर बड और दल अब छोट ह, इसान नीयत क खोट ह।
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यह समय त हारा शभ जीवन ह।
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ट हो रह ह अब सब, नौक रय क कोट ह ै
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त छ कभी तम नह ं एक पल को भी जानो
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हो कस उ न त दश क , सबक मन म बईमानी ह।
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पल-पल स ह बना हआ जीवन को मानो। पागल कर द इनसान को जो, पस क य अजब कहानी ह ।
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ऐसा भला और तम कब पाओग
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तो इसम वह काम तम कर जाओ
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सखी रह संसार तथा तम सख पाओ।
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स म पसवानी ९ मन वी पा टल ९
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