Page 13 - CSIR-IGIB Annual Report 2020-21
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है। बड़े पैमान पर, अनुराग क� प्रयोगशाला एक �डिजटल दु�नया म� स्वास्थ्य प्रणाल� के भ�वष्य को �नयं�त्रत करन के
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�लए ल�सट-फाइन��शयल टाइम्स आयोग के सह-अध्य� के रूप म� और �डिजटल स्वास्थ्य के �लए डब्ल्यूएचओ के
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तकनीक� सलाहकार समूह के सदस्य के रूप म� कायर् �कया है। नवीन अरोड़ा क� प्रयोगशाला एलज� अनुसंधान म�
अग्रणी रह� है और डीजल �नकास मध्यस्थता श्वसन �वकार� पर शोध म� भी अग्रणी रह� है। यहां उन्ह�न क ु छ कॉकरोच
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एलज�स द्वारा प्राप्त प्र�तर�ा प्र�त�क्रयाओं पर �रपोट क� , िजनका उपयोग एलज� म� हस्त�ेप के �लए �कया जा
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सकता है। वह रुग्ण पैथोलॉजी माकर� और miRNA प्रोफाइल के संबंध म� डीजल एग्जॉस्ट एक्सपोजर म� संस्था�नक
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�वक�सत माउस मॉडल के ल�ण वणर्न पर भी �रपोट करते ह�। यह फे फड़� के स्वास्थ्य और इसके प�रणाम� पर
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पयार्वरणीय प्रभाव को एक�क ृ त करन के �लए एक उपयोगी मंच हो सकता है। आस्था �मश्रा क� प्रयोगशाला कम
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ऑक्सीजन दबाव जस कठोर प�रवेश के प्रभाव पर प�रव�तर्त ए�पजन�टक घटनाओं और जीन �व�वधताओं क�
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भू�मका क� जांच करती है। यहाँ वह सलुलर मॉडल का उपयोग करते हए ऑक्सीजन स वं�चत प�रिस्थ�तय� म� CHOP
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मध्यस्थता वाल एंडोप्लािज्मक र�टक ु लम के तनाव क� स�क्रयता और सूजन समथर्क जीन क� अ�भव्यिक्त पर इसके
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बहाव के प्रभाव� पर �रपोट करती है। उनक� प्रयोगशाला पयार्वरण और जीनोटाइप �वशेषताओं के साथ CVD
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आनुवं�शक माकर् र� क� बेहतर भ�वष्यवाणी के �लए मशीन ल�न�ग एल्गो�रदम के साथ काम कर रह� है।
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यह �कसी �दए गए जीनोटाइप के आधार पर व्यिक्तगत दवा प्र�त�क्रया क� भ�वष्यवाणी करन क� �दशा
म� एक अग्रणी कदम है।
एपीजने�टक्स भी क ु छ हद तक स्वास्थ्य प�रणाम� म� आहार क� भू�मका क� व्याख्या करने म� स�म है। शांतनु
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सनगुप्ता क� प्रयोगशाला खराब आहार म� �वटा�मन बी 12 कै स �ड�स�प�ड�मया को प्रभा�वत करता है इसक� जांच
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कर रह� है। मानव नैदा�नक तथ्य का उपयोग ट्रांसजेनरेशनल �वटा�मन बी 12 क� कमी वाले चूहे के मॉडल
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म� , और एक काबर्न उपापचय का अध्ययन करन के �लए दूसर मॉडल के रूप म� खमीर म� करते हए,
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वह यहां �ल�पडो�मक और प्रो�टओ�मक स्तर के सा�य क� जानकार� दे रहे ह�, जो �वटा�मन बी 12 क�
क � द्र�य भू�मका और स्वास्थ्य म� एक-काबर्न उपापचय के संतुलन का समथर्न को दशार्ता है।
नॉन-को�डंग RNA, ए�पजेने�टक संशोधक� का सबसे बड़ा समूह बनाते ह� जो कायार्त्मक रूप से अपनी
�वशषता बनाए रहते ह�। न्यूरॉन्स म� ए�पजन�टक �व�नयमन म� रु�च रखने वाल� बीना �पल्लई क� प्रयोगशाला,
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न्यूरॉन्स म� जीन �व�नयमन के ए�पजन�टक मोड पर काम कर रह� है। मॉडल प्रणा�लय� म� काम करते हए, बीना क�
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प्रयोगशाला न्यूरोनल �वकास/पैथो�फिजयोलॉजी म� शा�मल नॉन -को�डंग आरएनए और उनक� �क्रया के तंत्र क�
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पहचान करन क� �दशा म� काम कर रह� है। वह क � चुओं को पुनजर्नन करन म� एक नए नॉन-को�डंग RNA क�
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पहचान कर चुक� ह�, जो काई�टन संश्लषण के �नयमन म� शा�मल miRNA के स्पंज के रूप म� शायद
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काम कर सकता है। माल�बका द�ा क� प्रयोगशाला मधुमह और इसस जुड़ी ज�टलताओं देखन म� सलुलर
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और पशु मॉडल का उपयोग करके ए�पजन�टक तंत्र क� जांच करती है। वह miRNA प्रसंस्करण एंजाइम,
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डाइसर का स्तर जो डाय�ब�टक घाव भरने का एक �नधार्रक मान ह� , उस पर ,पर कायर् करती है। इस
खोज का मधुमह वाल मनुष्य� के घाव भरने म� संभा�वत अनुप्रयोग क� भ�वष्य म� सम्भावना है। त्वचा
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रोग �व�ट�लगो म� घाव भरन क� प्र�क्रया स्वाभा�वक रूप स बदल जाती है। अचर्ना �संह क� प्रयोगशाला
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�व�ट�लगो स संबं�धत पथ� म� शा�मल जीन� के ए�पजन�टक संशोधक का अध्ययन करती ह�। यहाँ वह
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miRNAs क� भू�मका क� जानकार� देती ह� िजसक प�रणामस्वरूप हम यह पता चलता है �क मनुष्य� क�
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