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27 अगस्त 1947 र्ें,
ककि पता था िर्य क िक्र का
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अतर्मि क चित्कारों ि ,
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अनत दयिीय स्वऱूप,
अिह्य िैलाब उिा था।
हृदय पवदीणम करता िआ काल
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िब बि गया था क्र ू र। िब किा था उिि --
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िलवाि पररवार क पूणम िद्र , दगाइयों क दग र्ें
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आित िआ र्रा ब्रह्र्दत्त,
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ब्रह्र्दत्त की िीवि िहद्रका
औरों की प्राण रक्षा करते करते
पर छा गई निर्मर् अर्ावस्या,
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ििीद िआ र्रा अग्रि।
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िल रिी थी िब चगरधारी
िंपूणम धरा कांप उिी थी,
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और िरदार पटल की
और धरािायी िआ था चगरधारी,
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गंभीर पविारणीय ििाम,
सर्लती थी जििि िबको िांत्विा,
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तभी किीं चगरधारी क अिुि पुि
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सिवदत्त का ह्रदय चित्कार उिा था, आि उिी क हृदय ि,
निझमररणी िी बि रिी थी
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अपवरल वदिा।