Page 39 - karmyogi
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                िुि-िुि कर स्र्नत पथ क िंस्कार िभी,
                                           ृ
                   एक िई िुबि की रजश्र्यों को

                        भर कर अपिी आंखों र्ें,


         िला वि पचथक भपवपय की िई रािों र्ें।

                                                                 ं
                                   े
               चगरधारी क पररश्रर् की बूद बूद ि                                   े
                                                                         ं
                                      िआ ऋणी,
                                        ु

                    पिावर का िलवाि पवद्यालय,
                       े
                              र्ूलराि िलवाि को


                   िो दी           चगरधारी ि श्रद्धांिसल,
                                                        े
                                   उिि िी िआ
                                             े
                                                        ु
                           निसर्मत यि सिक्षालय,


                       इिर्ें िर्स्त र्ािवता का

                            कल्याण निहित था ,


                                                  े
                               निर्ाता क ह्रदय र्ें,
                                         म
                               भावसितत िो रिा


             अपि पपता का                      निहित िम्र्ाि था।
                       े
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