Page 43 - karmyogi
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"सिक्षापवद का पुिरुत्थाि"





          िरणाचथमयों क पुिवाि
                                   े
                                                 म
               पर था िंकट खडा,


      आिार ,व्यविाय और आय


   पर था िर्य का खंिर िडा ।

                                                 ं
           िीवि अंनतर् र्ूल्याकि

            की ओर था बढ़ रिा,

                  िर्ाि क प्रनत                                                                                                      पुिवाि ििी ििि था,
                                   े
                                                                                                                                                             ं
                                                                                                                                                म
    चगरधारी की प्रनतबद्धता का,                                                                                                                    िभी ओर


   कहिि प्रश्ि पि था रि रिा।                                                                                                 िांप्रदानयक अिांनत का किर था,


                                                                                                                                              िोता जितिा

                                                                                                                                                                       े
                                                                                                                              बाधाओं को पार करि का प्रण,

                                                                                                                                            बढ़ता उतिा िी

                                                                                                                                   निरतर दगों का आक्रर्ण,
                                                                                                                                         ं
                                                                                                                                                    ं
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