Page 44 - karmyogi
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सिवदत्त की स्र्नतयों र्ें
ृ
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कौंध उि थ े
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अतीत क कछ वणम,
ु
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याद आि लग ,
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पपता क र्ि र्ें
उिते कई प्रश्ि,
" करता तयों ििीं
दगों का पवरोध गांधी का अििि?"
ं
हृदय र्ें अिंत पवषाद सलए,
अपिी िर्ीं को
े
छोडि का घोर अविाद सलए,
ं
िरणाथी तयू झेल रि थ े
े
र्त्यु तुल्य िीवि? िरणाथी ििीं किलािा,
ृ
चगरधारी क र्ि र्ें
े
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अंतरात्र्ा फटकारती ि,
नतलसर्ला रिा था यि द्वंद्व,
िर्ें तो बि उत्तरदानयत्व निभािा ।
छटपटाता आत्र्िम्र्ाि
कि रिा था -