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"अशांत समय की शांत तलाश "








                        इधर िंघषम का िरर् अभ्युदय

                                            िआ उधर
                                               ु

                                     पूणम िंद्र का उदय।


        िभी और धू धू कर िलि लगी हिंिा की अजग्ि,
                                                          े
                            किीं कोर्ल िी बाल्यावस्था


                                    र्र्ामित िो रिी थी,

                                                                           ं
                                                          े
                     तो किी अपर्ाि क िवि कड र्ें,
                                    ं
                                                                           ु
                                    िििी िल रिी थी,

                  किीं स्वििों को खोि की पीडा का
                                                            े
                                     गिि पवषाद था,


                                कि द कोई िांत्विा,
                                       े
                                            े
                                   ै
                     े
         िब प्रर् और पवश्वाि पर गिराया अविाद था।
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