Page 32 - karmyogi
P. 32
"अशांत समय की शांत तलाश "
इधर िंघषम का िरर् अभ्युदय
िआ उधर
ु
पूणम िंद्र का उदय।
िभी और धू धू कर िलि लगी हिंिा की अजग्ि,
े
किीं कोर्ल िी बाल्यावस्था
र्र्ामित िो रिी थी,
ं
े
तो किी अपर्ाि क िवि कड र्ें,
ं
ु
िििी िल रिी थी,
किीं स्वििों को खोि की पीडा का
े
गिि पवषाद था,
कि द कोई िांत्विा,
े
े
ै
े
िब प्रर् और पवश्वाि पर गिराया अविाद था।